गुरुवार, 21 जनवरी 2010

सुबह...ओस...ज़िंदगी...

सुबह
पत्ते से फिसलती
ओस की बूंद
लगती है
जैसे
धीरे धीरे
हाथों से फिसलती
ज़िंदगी....

काल चक्र

हिन्दी फोनेटिक कुंजी पटल

देवनागरी