रविवार, 17 अप्रैल 2011

कौन से मौसम में चले आए हो बादल...

बेमौसम बरसात ने दिल्ली को भिगो डाला है...अब बैठे ठाले मोबाइल में कुछ अशआर लिखे...उन्हें दिल्ली की बेमौसम लेकिन बामज़ा बारिश को समर्पित करता हूं...

ये कौन से मौसम में चले आए हो बादल
क्या तुम भी शायरों की तबीयत में ढल गए

तपते थे जिस्म तुमने भिगोए हैं इस तरह
मौसम की तरह रूह के तेवर बदल गए

जैसे मिजाज़ ए यार बदलता है यक ब यक
तुम आए और प्यास के मंज़र मचल गए

भीगा हूं मैं भी, यार भी भीगा हुआ होगा
बस बारिशों में अबकि तगाफुल निकल गए

है जिस्म भी हारा हुआ और रूह परेशां
आए जो तुम गरज के तो अरमान पल गए

हर रात तुम्हारे लिए जलता रहा हूं मैं
पानी में लगी आग देखो तुम भी जल गए...

मयंक सक्सेना

काल चक्र

हिन्दी फोनेटिक कुंजी पटल

देवनागरी