बुधवार, 7 अक्तूबर 2009

पूर्णमिदं

(एक कविता जो कुछ खास है.....एक कविता तो बेहद गहरे भावों से लिखी गई है....एक कविता जो अब तक पन्नों में कैद थी आज ब्लॉग पर भी आ गई है...शायद इसकी भी पूर्णता इसी में थी...किसके लिए है का प्रश्न अनुत्तरित ही रहने दिया जाए तो बेहतर होगा.....)

तुम पुष्प हो
इसमें भ्रम नहीं
तुम्हारा अतिशय सौंदर्य
अतिशयोक्ति नहीं
तुम खिले भी हो
वो भी अपने
पूर्ण, भरपूर, अप्रतिम
यौवन के साथ
पर तुम्हारे फूलने
की खुशी
थी अधूरी
अब तक
सुगंध के बिना
और अब
जब
मेरा स्वेद
तुमसे मिल गया है
हम दोनो
पूर्णता की ओर हैं
मैं फूल गया हूं
और तम
चिर प्रतीक्षित
सुवासित....

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर कविता.......
    और अब
    जब
    मेरा स्वेद
    तुमसे मिल गया है
    हम दोनो
    पूर्णता की ओर हैं
    यह पूर्णता बनी रहे इस आकांक्षा के साथ...

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  2. गहरे भावों को अभिव्यक्त करती कविता ..!!

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