गुरुवार, 31 मई 2012

मुस्काती है एक औरत....

चित्र - साभार - 'द हिंदू'(24 दिसम्बर, 2011)
एक औरत मुस्कुराती है, 
दूसरी अनजान औरत को देख कर 
बना देती है जगह, 
उसके बैठने को 
थाम लेती है उसका असबाब,
सम्भाल लेती है
उसका बच्चा

एक पुरुष
दूसरे पुरुष को घूरता है
एक पुरुष कुहनी मारता है
दूसरे पुरुष को
देख कर एक औरत को
एक पुरुष झगड़ता है
दूसरे पुरुष से
देता है भद्दी भद्दी गालियां
उसके घर की औरतों को
एक पुरुष दूसरे पुरुष को
कहता है
जानता है तू मैं कौन हूं

एक औरत प्रेम करती है
एक पुरुष से
एक औरत लुटा देती है
सब कुछ दो पुरुषों पर
पति पर, बेटे पर
एक औरत को सताते हैं
हमेशा उसके पुरुष
एक औरत को लूटते हैं
अपने ही पुरुष
एक औरत फिर भी
भरोसा करती है
पुरुषों पर
एक औरत सहम जाती है
अनजान पुरुषों के बीच

एक पुरुष हंसता है
एक औरत से धोखा कर के
एक पुरुष घूरता है
एक औरत को
एक पुरुष दबाता है
कुचलना ही चाहता है
एक औरत को
एक पुरुष मानता है मूर्ख
एक औरत को
एक पुरुष समझता है
इंसान और औरत को अलग अलग चीज़
एक पुरुष का पौरूष
बढ़ जाता है
रौंद कर एक औरत को

एक पुरुष कहता है
दूसरे पुरुष से
दबा के रखो अपनी औरत को
एक पुरुष मानता है
अपने दबंग दोस्त को सच्चा पुरुष
एक पुरुष शिकायत करता है
दूसरे पुरुष से
अपनी औरत की
एक पुरुष बना देता है
एक औरत को मशीन
एक पुरुष चाहता है
एक औरत से अच्छा खाना
अच्छा सेक्स और आज्ञाकारी बच्चे
एक पुरुष कम ही चाहता है
एक औरत को

एक औरत समझती है
दूसरी औरत को
एक औरत जानती है एक से हैं
हर औरत के हालात
एक औरत को है हमदर्दी
हर दूसरी औरत से
एक औरत आज फिर
पिट कर आई होगी अपने पुरुष से
एक औरत घर जाकर
बनाएगी उसी पुरुष के लिए खाना
पालेगी उसके ही बच्चे
संभालेगी उस का घर
इसीलिए वो बांट लेती है
दर्द दूसरी औरत का
इसीलिए एक औरत मुस्कुराती है
दूसरी अनजान औरत को देख कर
बना देती है जगह,
उसके बैठने को
थाम लेती है उसका असबाब,
सम्भाल लेती है
उसका बच्चा.....

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मयंक सक्सेना
30 मई 2012, 10.50 रात

3 टिप्‍पणियां:

  1. इन दोनों पाटों में पिसकर,जीवन का अर्थ समझ लेना
    स्नेह,प्यार,ममता खोजे, बस यही कहानी जीवन की !

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  2. Kitna sahee kaha aapne aur wo bhee itni sundartase!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सशक्त तुलनात्मक अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं

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