मंगलवार, 27 मई 2014

विस्थापन से जंग



बहुत ज़िद्दी होते हैं 
कबूतर 
और गिलहरियां 
विस्थापित कर दिए जाने के बावजूद 
शक्तिशाली मनुष्य के सामने 
हार नहीं मानते 
लौट आते हैं फिर-फिर 
चहलकदमी करते हैं 
इंसानों के खड़े कर दिए गए 
विशाल ढांचों के 
आंगनों में 
कूदते हैं 
इस छत से उस छत 
करते हैं बीट 
खुजलाते हैं पांखें 
बैठ किसी रोशनदान या खिड़की में 
कब्ज़ाए रखते हैं 
मुंडेर, शेड और खिड़कियां 
पानी की टंकियां 
बंद पड़े कमरे और पंखे 
आसानी से 
बल्कि किसी भीा तरह से 
अपनी ज़मीन 
अपनी जगह नहीं छोड़ते हैं 
कबूतर और गिलहरियां 
आप जीत जाते हो 
लेकिन वो हारते नहीं हैं 
छोड़ कर नहीं जाते 
अपना घर...अपनी ज़मीन

1 टिप्पणी:

  1. एक लाल घर जो मेरे घर की परिभाषा के सबसे करीब था, वो भी छूट गया.
    फिर से चार दीवारो और एक छत ढूंडने के लिये अभिशप्‍त हु जिसे कम से क़म मकान कह सकू.

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