रविवार, 17 फ़रवरी 2008

हिमांशु का वसंत

एक युवा पत्रकार साथी हिमांशु ने एक बेहद उम्दा कविता लिखी है वसंत पर
आनंद लें

नेह का लेकर संदेसा संगिनी मधुमास आया
हो गया देखो सुमुखि भूमि का आँचल सुनहरा
हर तरफ होता तरंगित प्रेम का आगार गहरा
प्रीति के जल में प्रिये प्रकृति का कण कण नहाया
नेह का .................

आज आते रूपसी कितने मधुर सपने नयन में
क्यों न कह देती प्रिये, छुपती हो जो स्वमन में
कितना सुन्दर अवसर है देखो रोम रोम हर्षाया
नेह का ,,,,,,,

क्यों न मानव देखता सभी में निज कंत को
देखता वह क्यों नहीं हर घडी में बसंत को
क्यों न उसके ह्रदय ने अभी तक विस्तार पाया
नेह का जब ले संदेसा हर बरस मधुमास आया
नेह का ,,,,,

हिमांशु बाजपेयी

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