काल चक्र

Saturday, June 27, 2009

जुल्फ - अंगडाई - तबस्सुम


अदम गोंडवी का नाम किसी के परिचय का मोहताज़ नहीं है....आज एक और उनकी नज़्म आपके लिए लाया हूँ....


जुल्फ - अंगडाई - तबस्सुम -
चाँद - आईना -गुलाब
भुखमरी के मोर्चे पर
इनका शबाब
पेट के भूगोल में
उलझा हुआ है आदमी
इस अहद में किसको फुर्सत है
पढ़े दिल की किताब
इस सदी की तिश्नगी का
ज़ख्म होंठों पर लिए
बेयक़ीनी के सफ़र में
ज़िंदगी है इक अजाब
डाल पर मजहब की पैहम
खिल रहे दंगों के फूल
सभ्यता रजनीश के
हम्माम में है बेनक़ाब
चार दिन फुटपाथ के साये में
रहकर देखिए
डूबना आसान है
आंखों के सागर में जनाब
अदम गोंडवी

4 comments:

AlbelaKhatri.com said...

IS AHAD ME KISKO FURSAT HAI..
PADHE DIL KI KITAAB.........

waah
waah
adam saaheb zindabaad !

विनोद कुमार पांडेय said...

वाह,
कितना बढ़िया
मेरे पास शब्द नही की मैं तारीफ करूँ ज़्यादा
बस इतना कहता हूँ पहले लाइन से ही दिल को छू गया.

ओम आर्य said...

bahut hi sundar rachana .................waah waah waah waah waah ...............behatarin

अनुपम अग्रवाल said...

इन रचनाओं को
धूप दिखलने का
काम भी तो है
बेहिसाब.. लाजवाब...

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देवनागरी