शनिवार, 4 अक्तूबर 2008

इक शमा और जला लूँ

हिन्दी भाषा के ब्लॉग क्रान्ति के आन्दोलन में एक और क्रांतिकारी शामिल हो गया है......क्रान्ति इस सन्दर्भ में की ब्लॉग ने हिन्दी जगत में ग़दर मचा दिया है और क्रांतिकारी वह हर व्यक्ति जो ग़दर मचाना चाहता है ! फिलहाल ग़दर में न फंस कर मुद्दे पर आते हैं तो एक नया ब्लॉगर आप सबके बीच आ गया है और उनका परिचय कराता हूँ आपसे ......ये हैं अनुपम अग्रवाल जी। लखनऊ के रहने वाले अनुपम जी पेशे से इंजिनियर है और फिलहाल विद्युत् अभियंता के रूप में उत्तर प्रदेश के अनपरा प्लांट में कार्यरत हैं।

खाली समय में शानदार कवितायें और ग़ज़ल लिखने वाले अनुपम जी के ब्लॉग पर पहली ग़ज़ल एक बानगी भर है......

प्यास महफ़िल की बुझा लूँ तो कहीं और चलूँ

इक शमा और जला लूँ तो कहीं और चलूँ

सबसे बड़ी बात है की जब लोग आराम करने की सोचते हैं उस वयमें अनुपम जी कंप्यूटर से खेल रहे हैं और ब्लॉग्गिंग शुरू की है....... तो देखा जवानी तब तक है जब तक आप उसे महसूस करें.....

तो अनुपम जी का ब्लॉग देखें ....... नाम है ..............ज़िन्दगी

www.aapkesamne.blogspot.com

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