"और कुछ नया ताज़ा सुनाओ..." (कविता)
आजकल
अक्सर
एक बेहद अजीब
और बेहद मुश्किल सवाल से
बार बार
घिर जाता हूं...
जितनी बार
ये सवाल पूछा जाता है
उतनी बार
कुछ नया
कह पाने की चाहत में
हर बार
पुराना जवाब दोहराता हूं...
हर बार वो
जानना चाहते हैं
कुछ ताज़ा ऐसा
अब तक न देखा, सुना गया
न घटा हो कभी वैसा
मैं कभी अनमना
कभी चिड़चिड़ा
कभी उदास
तो कभी नाराज़ हो जाता हूं
पर फिर भी
हर बार
पुराना जवाब दोहराता हूं...
पर फिर भी
हर बार दोबारा
वही सवाल पूछते वक्त
उनको अपेक्षा है मुझसे
कुछ अलहदा सुनने की
दरअसल हम सब
जानना चाहते हैं
दूसरे की ज़िंदगी का
कुछ अलहदा पल
क्योंकि किसी की भी
ज़िंदगी में
कुछ नया नहीं है आज कल...
चाय वैसी ही
कई बार उबाली गई....
वही दफ्तर की मेज
हर शनिवार को संभाली गई
वही लोग
भागता-हांफता शहर
भोगते-झेलते हम
घड़ी में वक्त भी कमबख्त
हर रोज़ लौट आता है..
सिर्फ़ कैलेंडर ही
हर साल बदला जाता है....
सब कुछ वैसा ही है
हर रोज़
जारी है फिर भी
नए की अनंत खोज
तुम चाहें कितनी ही बार
अपने रटे रटाए
सधे हुए, गिने हुए...
उत्तर दोहराओ....
वो हर रोज़ तुमसे कहेंगे....
.........
"और कुछ नया ताज़ा सुनाओ..."
दरअसल हम सब
जवाब देंहटाएंजानना चाहते हैं
दूसरे की ज़िंदगी का
कुछ अलहदा पल
और फिर शायद कुछ रोमांचकारी, सस्पेंसभरा और जिसमें कुछ और जोड़ा घटाया जा सके
बेहद खूबसूरत कविता
नया ताजा जानने की चाहत तो बनी ही रहेगी..चाहे आप लाख चिड़चिड़ाओ. :)
जवाब देंहटाएंchona farewell ka gana yaad hai.......`kuch to log kahenge...` kehne do waqt ane pe unko unke jawab mil jayenge.........
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंbahut khub
shekhar kumawat
http://kavyawani.blogspot.com/
Kitna sahi kaha...kuchh taza na pane ke karan huee wahi kambakht boriyat!
जवाब देंहटाएंaapke free verse main bhi rhythm hain... bahut accha lagaa padh kar :)
जवाब देंहटाएंनया ताजा जानने की ललक ही तो हमे हमारी बासी जिंदगी से उबारती है । सुंदर कविता ।
जवाब देंहटाएंcommon par alhada sa
जवाब देंहटाएंbadhiyan....sach hai..jab khud ki zindagi me naya na ho to dusron ki khushiyon ka hissa banne ka man hota hai..kyonki insaan ka dil to bachcha hai ji
जवाब देंहटाएंVery True.
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