शनिवार, 7 फ़रवरी 2009

वसंत.......


सुमित्रानंदन पन्त का नाम कौन साहित्य प्रेमी नहीं जानता, प्रकृति पर अपने बेजोड़ रचनाकर्म के चलते उनको प्रकृति का सुकुमार कवि भी कहा जाता है। आज प्रस्तुत है वसंत पर उनकी एक अनुपम कृति.....
वसंत
चंचल पग दीपशिखा के धर
गृह, मग़, वन में आया वसंत
सुलगा फागुन का सूनापन
सौन्दर्य शिखाओं में अनंत
सौरभ की शीतल ज्वाला से
फैला उर उर में मधुर दाह
आया वसंत, भर पृथ्वी पर
स्वर्गिक सुंदरता का प्रवाह
पल्लव पल्लव में नवल रूधिर
पत्रों में मांसल रंग खिला
आया नीली पीली लौ से
पुष्पों के चित्रित दीप जला

अधरों की लाली से चुपके
कोमल गुलाब से गाल लजा
आया पंखड़ियों को काले- पीले
धब्बों से सहज सजा

कलि के पलकों में मिलन स्वप्न अ
लि के अंतर में प्रणय गान
लेकर आया प्रेमी वसंत
आकुल जड़-चेतन स्नेह प्राण

सुमित्रा नंदन पन्त

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