शुक्रवार, 14 दिसंबर 2007

सम्पादकनामा


देश और दुनिया में इन दिनों कई तरह कि हवाएं चल रही हैं, पर बदकिस्मती से इनमे से कोई भी बहुत सुकून देने वाली नही है। दुनिया कि ही तर्ज़ पर मीडिया में भी कई तरह कि हवाएं चल रही हैं पर इनमे से न तो कोई रूहानी है और न ही सुहानी .............. दरअसल इन्ही हवाओ से तंग आ कर हमने यह सोचा कि क्यो न खुद ही ताज़ा झोंके चलाने कि कोशिशे कि जाएं और उपजा यह ब्लोग ! हमारी यह कोशिश है कि वाकई ज़रूरी मुद्दों ( राखी- मिका, ऐश-अभिषेक और रियलिटी शोस से ज्यादा ज़रूरी.... ) पर बहस और विचार किया जाये और कुछ वाकई अच्छे लेखों को रद्दी में बिकने से बचाया जा सके ...... पत्रकारिता शायद पत्रकारिता होनी चाहिऐ और उसके लिए इस मीडिया वर्ल्ड में ताज़ा हवा चलनी ही चाहिऐ आमीन ! हम कोशिश करेंगे कि हमारी सोच हमेशा ऐसी ही रहे और यह पहला सम्पादकनामा कभी आख़िरी का मुँह न देखे। एक खास बात और हम लेकर आएंगे हर बार एक अलग संपादक यानी हर हफ्ते नया फ्लेवर पर ध्यान रहे शर्तें लागू हैं ....................... *


*चेतावनी - ऐ सी कि हवाएं पसंद करने वाले कृपया सावधान यह ताज़ा हवा है ............. शायद रास न आये।

मयंक सक्सेना

8 टिप्‍पणियां:

  1. posts n updates dekh kar lag raha hai k blog 'taaza hawa' apne naam ko saarthak kar raha hai..

    sampaadak ko badhaai,
    shubhkaamnayein
    ROHINI

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  2. mayank bhaee [taaza hava ka jhonka]blog sambandhit aapke iradon par bhi chalti rahe. aapka apna ajeet

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  3. hawaon ka irada, hausla e bandi ka hai. par sirf hawa ban k mat ho rawan, balki us toofan ka manzar bana, ki galat soch tujh se dare aur kamzor tera daman thaame.
    umeed hai ki yeh apne naam aur kaam ko zimmedari se nibhaye.
    DEVIKA.

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  4. mitra mayank taaza havaen,k liye hardik badhai..
    kuch naye ki ummeed tumse hamsa rahegi..
    tumhara apna..
    nitin sharma

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  5. Taja have like of fresh wind hai.yah pahal kaphi sarahniye hai.i hope that you start this journal.

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