शनिवार, 22 मई 2010

3 बजे याद है न....


अविनाश जी के साथ मैं खड़ा हूं आपके इंतज़ार में....

तो मिलते हैं सही वक्त पर...

सही जगह...

सही इरादों को....

सही अंजाम पर पहुंचाने....

जाट धर्मशाला

नांगलोई....

बस कुछ ही घंटों बाद....

2 टिप्‍पणियां:

  1. भाई मैं तो पहुंच चुका हूँ ,आप सब कहाँ हैं ?

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  2. मयंक जी,
    आगे का विवरण भी तो लिखो।

    उत्तर देंहटाएं

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