शुक्रवार, 21 मई 2010

प्रताप सोमवंशी...एक पत्रकार की कविकारिता...


किसी के खास आग्रह पर एक लम्बी कविता पर काम कर रहा हूं....विषय भी एक आध दिन में कविता के साथ पढ़वा दूंगा....तो फिलहाल पढ़ें प्रसिद्ध पत्रकार प्रताप सोमवंशी की कुछ कविताएं...मुझे हमेशा लगता है कि प्रताप मीडिया में चंद अच्छा लिखने वालों में से एक हैं...और ये कविताएं बताती हैं कि ऐसा क्यों है....क्यों हर अच्छा लेखक मूलतः एक कवि होता है....                                                                                                                                                           

उसने मिट्टी को छुआ भर था....                                                                                                                                  

उसने मिट्टी को छुआ भर था

धरती ने उसे सीने से लगा लिया

उसने पौधे लगाए

ख़ुश्बू उसकी बातों से आने लगी

पेड़ समझने लगे उसकी भाषा

फल ख़ुद-ब-ख़ुद

उसके पास आने लगे

पक्षी और पशु तो

सगे-सहोदर से बढ़कर हो गए

जो मुश्किल भाँपते ही नहीं

उन्हें दूर करने की राह भी सुझाते हैं



मैने पूछा भाई प्रेम सिंह !

क्या कुछ खास हो रहा है इन दिनों

खिलखिला पड़े वो

कहने लगे-

लोग जिस स्वर्ग की तलाश में हैं

मैं वही बनाने में जुटा हूँ


कितना प्रतिभाशाली है.

कितना प्रतिभाशाली है
काम नहीं है खाली है


केवल फल से मतलब है
कैसे कह दूं माली है


थोड़ा और दहेज जुटा
बिटिया तेरी काली है


इनके हिस्से सारे सुख
उनके हिस्से गाली है


सपनों की दुकानें हैं
भाषण है और ताली है


प्रताप सोमवंशी

(प्रताप सोमवंशी वरिष्ठ पत्रकार हैं....पर उनकी कविताएं बोलती हैं कि दिल से एक मासूम और संवेदनशील कवि हैं। प्रताप ने  दक्षिण एशियाई मीडिया फेलोशिप के तहत वषॆ १९९९ में बुंदेलखंड के सिलिका खनन क्षेत्रों की महिलाओं पर अध्ययन  औरत और धरती का साझा दुख के नाम से किया। जनसत्ता, दैनिक भास्कर, वेबदुनिया डाट काम में विभिन्न पदों पर रहे। चित्रकूट पर एक वृत्त-चित्र का निर्देशन। रेडियो के लिए कई लघु नाटिकाएं लिखीं। कविताओं का कन्नड़, बांग्ला, उर्दू में अनुवाद सम्प्रति हिंदुस्तान समाचार पत्र में वरिष्ठ सम्पादकीय पद पर कार्यरत।)
 

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