मंगलवार, 25 मई 2010

जब वी मेट....शायद सबसे लेटलतीफ रिपोर्ट...और लम्बी भी....

जब से अविनाश जी ने बताया था कि रविवार को सब मिल रहे हैं...सब से मतलब अपने उस परिवार से था जो पूरे देश में फैला है...ब्लॉगरों का परिवार...या कहें तो चिट्ठाजगत, तब से ही दिमाग में खलबली मत गई थी, ऐसे में अविनाश जी ने जब खुला सार्वजनिक आमंत्रण नुक्कड़ पर प्रकाशित किया तो रहा नहीं गया। लगा कि अपना बी कुछ योगदान हो तो आनन फानन में एक आमंत्रण पत्र फोटोशॉप में डिज़ाइन कर के अविनाश जी को मेल कर मारा पर जल्दबाज़ी में तारीख गलत छप गई...और फिर उस पर भी खूब मज़े ले लिए गए, और वो भी मेरे नहीं वाचस्पति जी के....तो वाचस्पति जी से क्षमायाचना...खैर 22 की रात को सबसे तेज़ टीवी चैनल की सबसे ज़मीनी पर वरिष्ठ एंकर के बेटे के जन्मदिन की दावत में इतनी देर लगा दी गई कि घर लौटना हुआ सुबह के तीन बजे, ज़ाहिर है सोते सोते बज गया चार....और फिर शुरु हुए ब्लॉगर मिलन के सपने....
फिर अचानक सपने में ही एक गहरा काला सा साया दिखाई दिया, जिसका चेहरा तो नहीं दिखा पर सारे ब्लॉगरचिल्ला रहे थे "भागो-भागो बेनामी है....बेनामी का शोर मचा ही ता कि दूसरी ओर शोर उठा और कुर्सियां हवा में उड़ने लगीं, छत कांपने लगीं और कान में अविनाश जी की आवाज़ आई कि मयंक जी ज़लज़ला आ गया है..." और इसी सपने से डर कर जैसे ही आंख खोली तो देखा कि मोबाइल पर अविनाश जी का नम्बर फ्लैश हो रहा है। फोन उठाया तो अविनाश जी का सुपरिचित अंदाज़ और प्यारा सा प्रश्न कि कितने बजे तक पहुंच रहे हैं, कहां से चलेंगे और कैसे जाएंगे....उसके बाद पता चला कि ललित जी भी साथ हैं और ललित जी से बी ऐसे दुआ सलाम हुई जैसे पता नहीं कितने सालों से जान पहचान हो हमारी....
इसके बाद समझ में आया कि भैया बड़ी देर हो चुकी है, और फौरन तैयार होना शुरु किया गया...जल्दबाज़ी में एक चारलाईना पोस्ट डाली कि ब्लॉर सम्मेलन पलक पांवड़े बिछाए सबका स्वागत कर रहा है....और घर से निकल पड़ा गया। इस वक्त दोपहर के सवा एक बज चुके थे गले में अंगोछा डाला और बाइक को किक कर के निकल पड़ानोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन की ओर...सिटी सेंटर पहुंचकर गाड़ी को पार्किंग में लगाकर स्टेशन पर पहुंचा और जेब में से मेट्रो के उस रूटमैप का प्रिंटआउट निकाला जो घर से लेकर चला था.....और खोला तो वो कह रहा था कि भई नोएडा से पहुंचे कीर्ती नगर और फिर वहां से बदलें नांगलोई के लिए मेट्रो...और फिर उतर जाएं जाट धर्मशाला के लिए....तो फिर ले लिया गया नांगलोई रेलवे स्टेशन तक का एक टोकन....और चढ़ गए लाला मेट्रो में।सफ़र जितना सोचा था उतना भी आसान नहीं था, पत्रिका पढ़ते हुए जब कीर्ति नगर पहुंचे तो पता चला कि अभी वहां से नांगलोई की लाइन शुरु ही नहीं हुई है....अब तक पौने तीन बज चुके थे और दो बार अविनाश वाचस्पति जी का फोन आ चुका था....मन में एक शर्मिंदगी की बताइए पहली बार में ही फ़जीहत करवा ली, बड़े बड़े वादे किए थे अविनाश जी से और वक्त पर पहुंच ही नहीं पाएंगे....खैर अविनाश जी को फोन पर ही बताया कि अब आगे का सफ़र ऑटो से ही तय करना पड़ेगा और फिर कर लिया गया एक ऑटो...
ऑटो वाले चचा बड़े सज्जन आदमी निकले, प्रतापगढ़ के रहने वाले और जब उन्होंने अपने जैसी बोली सुनी तो अवधी में ही बतियाते रहे और सफ़र कट गया....और हम उतर पड़े जाकर छोटूमल जाट धर्मशाला के सामने....ऑटो से बाहर उतरे तो चौखट पर ही पवन जी मिल गए.....और अपने चिर परिचित अंदाज़ में चुटकियां लेते हुए उन्होंने स्वागत किया....इसके साथ ही मिले विनोद जी और वर्मा जी....मिलते ही लगा कि ठेठ बनारसी लोगों से गले मिल रहा हूं...खैर सफ़र में बहुत थक चुका था और जैसे ही अविनाश जी ने कहा कि शीतल पेय ले लूं तो शीतल पेय न पीने की आदत के बावजूद दो गिलास पी गया...और माणिक को खूब आशीर्वाद दिया...अब तक हम चौखट पार कर के नुक्कड़ तक आ चुके थे और सामने ही सामना हो गया बड़ी बड़ी सीधी खड़ी मूंछों से जो हमें देख कर मुस्कुरा रही थी...जी हां वो एक ही बार में पहचान लिए गए अपने भाईललित शर्मा जी, उसके बाद बगल में ही बैठी संगीता पुरी जी को जब हमने अपना परिचय दिया तो वो बी तुरंत ही पहचान गई...और बोली अच्छा आप ही मयंक सक्सेना हैं दरअसल संगीता जी से मेरा परिचय एक बार आपसी नोंक झोंक से हुआ था...और उनकी मेल मैंने आज भी सहेज कर रखी है। तब तक अंदर आ गए थे मेरे पसंदीदा ब्लॉगर....जो फौजी कैप लगाए एक और यात्रा को तैयार दिख रहे थे...अपने मुसाफ़िर जाट नीरज भाई, उनके साथ थे अंतर सोहिल.....नीरज भाई से मिला...हस्तिनापुर जाने की योजना भी बना डाली और उसके बाद काफी देर तक रतन सिंह शेखावत जी से ब्लॉगिंग की दिशा पर लम्बी चर्चा चलती रही....
अब सवाल ये ता कि अभी तक बैठक शुरु क्यों नहीं हुई थी...तो जवाब ये था कि अभी तक खुशदीप सहगल जीऔर मशहूर कार्टूनिस्ट इरफ़ान भाई नहीं पहुंचे थे....और फिर दोनो भी आ ही गए और विधिवत एक गोलाकार समूह में बैठकर शुरु हो गई बैठक....सबसे पहले अविनाश वाचस्पति जी जो कि इस बैठक के सूत्रधार थे उन्होंने अपनी बात सबके बीच रखी जो कि आप सब चौखट पर पढ़ चुके हैं....और इसके बाद जब तक तालियों की गूंज थमती तब तक आ चुके थे गर्मागर्म स्वल्पाहार (जो कि कहीं से भी अल्प नहीं था) के डिब्बे...और तय हुआ कि इन्हें निपटाने के बाद ही आगे की बैठक जारी की जाएगी....तो फिलहाल हम भी रोक रहे हैं कलम को ब्रेक के लिए आप तब तक स्वल्पाहार को निहारिए....और साथ में उस मेट्रो मैप को भी जिसने हमारी ऐसी तैसी कर डाली.....









(शेष कल....कल की किस्त में वो एजेंडा जो मैंने बैठक में पेश किया...और भी बहुत कुछ मज़ेदार बाते....)

13 टिप्‍पणियां:

  1. इस लेट लतीफ को अंक दे चुको तो आना परंतु मजबूत जिगर वाले बनकर क्‍योंकि http://jhhakajhhaktimes.blogspot.com/2010/05/blog-post_26.html यह लिंक कह रहा है कि इंटरनेशनल दिल्‍ली हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन - बेहद कमजोर जिगर वाले इन झलकियों को न देखें - भाग दो । और कुछ दो न लो पर टिप्‍पणियां जरूर दो। जिसमें राय बेबाक हो।

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  2. बड़ी रोचकता से ब्यौरा दिया जा रहा है..अगली कड़ी का इन्तजार!!

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  3. अरे यार हमसे रुट का पूछ लिया होता....हद है मयंक भाई...

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  4. रूट इतनी आसानी से मिल जाये तो ---
    रूट ही की तो तलाश है

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  5. इस रोचकता भरी अगली रिपोर्ट का इन्तजार ...........

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  6. रोचक प्रस्तुती /शानदार ,जानदार /

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  7. अरे भाई, इस रूट मैप पर ये भी तो लिखा है कि फेज टू। यानी कि जब कभी मेट्रो का फेज टू खत्म होगा तभी यह मैप काम आयेगा।
    हां तो, हस्तिनापुर की यात्रा फिक्स करिये।

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  8. रोचक प्रस्तुति
    अगली कड़ी की प्रतीक्षा

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  9. वाह मयंक भाई ,
    बिंदास लिखा आपने एक दम मजे में । अगली कडी की प्रतीक्षा रहेगी ।

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  10. रोचकता से भरपूर बढ़िया रिपोर्ट...अगली कड़ी का इंतज़ार रहेगा

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  11. ैक्या आप जानते है.
    कौन सा ऐसा ब्लागर है जो इन दिनों हर ब्लाग पर जाकर बिन मांगी सलाह बांटने का काम कर रहा है।
    नहीं जानते न... चलिए मैं थोड़ा क्लू देता हूं. यह ब्लागर हार्लिक्स पीकर होनस्टी तरीके से ही प्रोजक्ट बनाऊंगा बोलता है। हमें यह करना चाहिए.. हमें यह नहीं करना चाहिए.. हम समाज को आगे कैसे ले जाएं.. आप लोगों का प्रयास सार्थक है.. आपकी सोच सकारात्मक है.. क्या आपको नहीं लगता है कि आप लोग ब्लागिंग करने नहीं बल्कि प्रवचन सुनने के लिए ही इस दुनिया में आएं है. ज्यादा नहीं लिखूंगा.. नहीं तो आप लोग बोलोगे कि जलजला पानी का बुलबुला है. पिलपिला है. लाल टी शर्ट है.. काली कार है.. जलजला सामने आओ.. हम लोग शरीफ लोग है जो लोग बगैर नाम के हमसे बात करते हैं हम उनका जवाब नहीं देते. अरे जलजला तो सामने आ ही जाएगा पहले आप लोग अपने भीतर बैठे हुए जलजले से तो मुक्ति पा लो भाइयों....
    बुरा मानकर पोस्ट मत लिखने लग जाना. क्या है कि आजकल हर दूसरी पोस्ट में जलजला का जिक्र जरूर रहता है. जरा सोचिए आप लोगों ने जलजला पर कितना वक्त जाया किया है.

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  12. बढ़िया वृतांत ...शुभकामनायें !

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