संदेश

शहीद सुखदेव का महात्मा गांधी को पत्र

जनतन्त्र के सूर्योदय में

फिर देखें और फिर मज़ा लें....पक्का मज़ा आएगा

हो ना हो ........

बस देखें और मज़ा लें....दिल पे ना लें.....

शोर...

आज बिरज में होली रे रसिया.....

माँ काश तुम नारी होती.....

अब मैं वो नहीं.....

अँधेरे चारों तरफ़ .......

यह फागुनी हवा .........