शनिवार, 3 जनवरी 2009

नए साल की शुभकामनाएं


नए वर्ष के पहले दिन दफ्तर में काफ़ी व्यस्त रहा सो कुछ नया लिखने का वक्त नहीं निकाल पाया तो क्षतिपूर्ति के लिए प्रस्तुत है बेजोड़ साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की एक कविता नए साल की शुभकामनाएं

नए साल की शुभकामनाएं

नए साल की शुभकामनाएं !

खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को

कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को

नए साल की शुभकामनाएं !

जोते के गीतों को बैलों की चाल को

करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को

नए साल की शुभकामनाएं !


इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को

चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को

नए साल की शुभकामनाएं !


वीराने जंगल को तारों को रात को

ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को

नए साल की शुभकामनाएं !


इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को

सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को

नए साल की शुभकामनाएं !


कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को

हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को

नए साल की शुभकामनाएं !


उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे

उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे

नए साल की शुभकामनाएं !


सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ( कवि को संग्रह खूंटियों में टंगे लोग के लिए १९८३ में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया)

3 टिप्‍पणियां:

  1. नववर्ष की आपको भी शुभकामनाएँ।
    एक अच्छी कविता पढ़वाने के लिए धन्यवाद।
    घुघूती बासूती

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  2. आप और आपके परिवार को नव वर्ष की शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं

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