शनिवार, 24 जनवरी 2009

वली दक्कनी तीरे कारी आहिस्ता आहिस्ता

वली दक्कनी का मूल नाम वली मोहम्मद था और इन्हें वली गुजराती के नाम से भी जाना जाता है।
वली के लिखे का आप ख़ुद ही मुलाहिज़ा करें.....वली दक्कनी को हैदराबाद में बोली जाने वाली दक्कनी जुबां के प्रवर्तकों में माना जाता है...

तीरे कारी

जिसे इश्क़ का तीरे कारी लगे ।
उसे ज़िंदगी क्यों न भारी लगे ।।

वली जब कहे तू अगर यक वचन,
रक़ीबाँ के दिल पे कटारी लगे ।

न होगा उस जग में हरगिज़ क़रार,
जिसे इश्क़ की बेकरारी लगे ।


आहिस्ता आहिस्ता

सजन तुम सुख सेती खोलो नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता।
कि ज्यों गुल से निकसता है गुलाब आहिस्ता आहिस्ता।।

हजारों लाख खू़वाँ में सजन मेरा चले यूँ कर।
सितारों में चले ज्यों माहताब आहिस्ता आहिस्ता।।

सलोने साँवरे पीतम तेरे मोती की झलकाँ ने।
किया अवदे-पुरैय्या को खऱाब आहिस्ता आहिस्ता।।

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