शुक्रवार, 4 जनवरी 2008

आखिरकार सचिन का भाग्य जागा !


जी हाँ ... आखिरकार छोटे उस्ताद जो हालांकि काफी बडे हो चुके हैं ... अपने दुर्भाग्य से उबर पाए। सिडनी टेस्ट में जहाँ दूसरे दिन वी वी एस लक्ष्मन की चर्चाएं हवा में तैरती रही, तीसरा दिन मास्टर ब्लास्टर के नाम रहा। सचिन तेंदुलकर ने नर्वस नैन्टी के दबाव को घुमा के लात मारी और ऐसा बल्ला घुमाया कि टीम इंडिया की बल्ले बल्ले हो गयी। दरअसल पोरस के वक़्त से ही भारतीय योद्धा विश्व विजेताओ को टक्कर देते आए हैं, और वर्तमान सिकंदर आस्ट्रेलिया भी ऐसे ही योद्धाओ के पल्ले पड़ गयी है।

तेंदुलकर अकेले चलते तो कोई बात नही थी, ऑफ़ स्पिनर हरभजन सिंह ने भी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों कि सिलाई उधेड़ कर रख दी और ६३ शानदार रन बनाए। मैच के अंत में सचिन १५७ रन बना कर नाबाद रहे और भारत को ६९ रनों कि महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई।

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