सोमवार, 28 जनवरी 2008

गणतंत्र दिवस कुछ झलकियाँ

एक और गणतंत्र की सालगिरह बीत गयी और रह गया गणतंत्र अगली सालगिरह के इंतज़ार में ! ताज़ा हवा पर हम कुछ न कुछ नया ताज़ा लाते रहेंगे ऐसा वादा था सो हम इस बार लाये हैं ५८ साल के गणतंत्र की कुछ तसवीरें। इन तस्वीरो का मकसद मुल्क की बुराई या कमी ढूंढना नही बल्कि यह याद दिलाना है कि शहादत केवल आजादी के लिए और उसके पहले नही दी गयीं शहादतें उसके बाद भी जारी हैं। और शहादतों से आज सर उठाए जिंदा है यह गणतंत्र !!! ताज़ा नज़र है उनके गणतंत्र दिवस पर जिन पर शायद हमारी नज़र नहीं ..........................





































एक गुजारिश है सभी बांचने वालो से कि इन तस्वीरो के शीर्षक खो गए हैं अगर वक़्त मिले तो ढूंढ कर हमें ज़रूर भेजे ..... कुछ मुश्किल नही वो आपके जेहन में ही कहीं गुम हैं !

चीन ओ अरब हमारा हिंदोस्ता हमारा
रहने को घर नहीं है सारा जहाँ हमारा
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2 टिप्‍पणियां:

  1. yaar sahi kahte ho yahi hai loktantra ki hakikat bharat me. 27 karore logon ko sahi se do joon ki roti nahi mil pati aur hum 9.4 percent GDP par itarate hain. charo taraf har level par bhrastachar hai, lakhon logon ke liye court se nyay door ki kauri hai aur ham bade hi garv se 26 january ko manate hain loktantra me aastha ka tyohaar. parade ke naam par ham topon aur doosre deshon se khareede gaye fighter jahajon ko bade hi shan ke saath dikhate hain. lekin hum nahi dikhate hain is din vidarbh aur bundelkhand par koi jhanki. aakhir hamare niti nirmata inhe dikhyein bhi kyon. aakhir yah garv thode hi hai. aur kahin yah national issue ban gaya to. aakhir kab tak hum itarate rahenge fijool ke shanon se. hume roti ya hathiyaar me se kise ek ko hi chhonana hi padega. roti choonana kathin hai kyonki hathiyaar apne saath fdi bhi la rahe hain.

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